अखिल भारतीय राजभाषा समीक्षा बैठक

वार्षिक समीक्षा बैठक 2023

बैंक ने दिनांक 18-20 मई, 2023 को कोवलम (तिरुवनंतपुरम) में अखिल भारतीय राजभाषा समीक्षा बैठक का आयोजन किया। इस अवसर पर बैंक के कार्यपालक निदेशक, श्री अजय के खुराना, प्रमुख-(राजभाषा एवं संसदीय समिति) श्री संजय सिंह, सहायक महाप्रबंधक (राजभाषा एवं संसदीय समिति) श्री पुनीत कुमार मिश्र एवं अन्य कार्यपालकगण तथा देश भर के राजभाषा प्रभारी/ अधिकारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर कार्यपालक निदेशक श्री अजय के खुराना ने सभी राजभाषा अधिकारियों को संबोधित किया तथा वर्ष के दौरान श्रेष्ठ कार्यनिष्पादन करने वाले अंचलों/ क्षेत्रों के राजभाषा अधिकारियों/ प्रभारियों को पुरस्कृत किया गया।

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कार्यपालक निदेशक श्री अजय के खुराना द्वारा राजभाषा विभाग के वेब पृष्ठ "शब्दनाद" का शुभारंभ


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डॉ बी. अशोक, असोसिएट प्रोफेसर एवं मुख्य, सरकारी कॉलेज, चीडूर, केरल जी का अखिल भारतीय राजभाषा समीक्षा बैठक 2023 में राजभाषा प्रमुख श्री संजय सिंह द्वारा पुस्तक एवं शाल भेंट कर स्वागत किया गया।

डॉ बी. अशोक द्वारा दक्षिण भारत में हिंदी की महत्ता विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया गया एवं दक्षिण क्षेत्र में हिंदी के प्रयोग की चुनौतियों एवं संभावनाओं पर प्रकाश डाला गया।


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कार्यपालक निदेशक श्री अजय के खुराना तथा राजभाषा प्रमुख श्री संजय सिंह के साथ बैंक की राजभाषा टीम


भारत सरकार के दिशानिर्देशों के अनुपालन में तथा वार्षिक राजभाषा कार्ययोजना के अनुसार हमारे कॉर्पोरेट राजभाषा विभाग द्वारा प्रत्येक वर्ष बैंक के राजभाषा प्रभारियों की समीक्षा बैठक का आयोजन किया जाता है। इस बैठक में वार्षिक राजभाषा कार्ययोजना की विभिन्‍न मदों पर हुई प्रगति और भारत सरकार द्वारा जारी राजभाषा विषयक लक्ष्यों की प्राप्ति के संबंध में ‘क’, ‘ख’, एवं ‘ग’ भाषिक क्षेत्रवार स्थिति की समीक्षा की जाती है तथा विभिन्‍न स्‍तरों पर राजभाषा कार्यान्‍वयन को प्रभावी बनाने हेतु आवश्‍यक विचार-विमर्श किया जाता है। इसके साथ ही बैंक के उच्‍च प्रबंधन द्वारा राजभाषा प्रभारियों को राजभाषा कार्यान्‍वयन के संबंध में उपयोगी मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाता है।

यह बैठक दो चरणों में आयोजित की जाती है। 1) वार्षिक समीक्षा बैठक एवं 2) अर्द्धवार्षिक समीक्षा बैठक। वार्षिक समीक्षा बैठक के अंतर्गत बैंक के सभी राजभाषा अधिकारियों जबकि अर्द्धवार्षिक समीक्षा बैठक में अंचलों एवं बड़ौदा एपेक्स अकादमी में पदस्थ राजभाषा अधिकारियों के कार्यों की समीक्षा की जाती है। समीक्षा के साथ-साथ आने वाले वर्ष में राजभाषा कार्यान्वयन हेतु चर्चा-विमर्श कर कार्य योजना भी तैयार की जाती है।

वार्षिक समीक्षा बैठक 2022 :

दिनांक 25-27 मई 2022 तक गंगटोक में बैंक के राजभाषा अधिकारियों की वार्षिक समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में राजभाषा अधिकारियों द्वारा वर्ष 2021-22 में किए गए राजभाषा संबंधी कार्यों की समीक्षा की गई। साथ ही, राजभाषा कार्यान्वयन की दिशा पर भी विस्तृत चर्चा की गई। दो दिनों की गहन समीक्षा के बाद तीसरे दिन महाराजा सयाजीराव लोक भाषा सम्मान एवं बड़ौदा राजभाषा पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता कार्यपालक निदेशक श्री अजय के खुराना ने की। सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में लोकगायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने भी शिरकत की जिन्हें महाराजा सयाजीराव लोक भाषा सम्मान अर्पित किया गया। इस अवसर पर मुख्य महाप्रबंधक (परिचालन) श्री अजय के खोसला, कोलकाता अंचल के नेटवर्क उप महाप्रबंधक श्री सोनाम टी भूटिया, प्रमुख - राजभाषा एवं संसदीय समिति श्री संजय सिंह, क्षेत्रीय प्रमुख, सिलीगुड़ी श्री दिलीप कुमार प्रसाद एवं सहायक महाप्रबंधक (राजभाषा एवं संसदीय समिति) श्री पुनीत कुमार मिश्र उपस्थित रहे।

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अर्द्धवार्षिक समीक्षा बैठक 2022 :

दिनांक 05-06 दिसंबर, 2022 को राजभाषा अधिकारियों की अर्द्धवार्षिक समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक के उद्‌घाटन सत्र में प्रसिद्ध भाषाविद्‌, लेखक एवं अनुवादक डॉ. शंकरलाल पुरोहित मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस बैठक में सभी अंचलों और चयनित नगर समितियों के राजभाषा विषयक कार्यों की समीक्षा की गई। इस अवसर पर प्रधान कार्यालय द्वारा चलाए गए विभिन्न अभियानों के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। बैठक में कार्यपालक निदेशक श्री अजय के खुराना, पटना के अंचल प्रमुख श्री सोनाम टी भूटिया, प्रमुख-राजभाषा एवं संसदीय समिति श्री संजय सिंह, नेटवर्क उप महाप्रबंधक श्री आर के मोहंती, भुवनेश्वर क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रमुख श्री राजीव कृष्णा, सहायक महाप्रबंधक (राजभाषा एवं संसदीय समिति) श्री पुनीत कुमार मिश्र उपस्थित रहे।

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हमारे बैंक ने सम्पूर्ण बैंकिंग उद्योग में राजभाषा कार्यान्वयन के क्षेत्र में उत्कृष्ट स्थान हासिल किया है। बैंक नवोन्मेषी कार्यों की शुरुआत के लिए बैंकिंग जगत में अपनी अलग पहचान रखता है। ऐसे ही अभिनव कार्यों की श्रृंखला में हमारे संस्थापक महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ (तृतीय) की स्मृति में बैंक द्वारा 'महाराजा सयाजीराव भाषा सम्मान' की शुरुआत की गई जिसे काफी अच्छा प्रतिसाद मिला। इस प्रतिसाद को देखते हुए एवं भाषा एवं साहित्य हेतु अपनी जिम्मेदारी को समझने की इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हुए बैंक ने एक और नए सम्मान ‘महाराजा सयाजीराव लोक भाषा सम्मान’ की घोषणा की।

हिन्दी को समृद्ध करने एवं जन-जन तक पहुंचाने में हिन्दी से इतर भारतीय भाषाओं के विद्वानों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इन विद्वानों की मातृभाषा हिन्दी न होने के बावजूद इन्होंने हिन्दी साहित्य तथा हिन्दी में ज्ञान- विज्ञान, प्रशासन, प्रबंधन आदि में अखिल भारतीय स्तर पर अपने लेखन से विशिष्ट स्थान बनाया है, ऐसे हिन्दीतर विद्वानों के सम्मान हेतु बैंक द्वारा "महाराजा सयाजीराव लोक भाषा सम्मान" की शुरुआत की गई है। यह पुरस्कार देश के ऐसे हिन्दीतर विद्वान (जिनकी मातृभाषा हिन्दी नहीं है) को प्रदान किया जाता है जिसने गैर हिन्दी भाषी प्रदेशों में हिन्दी के उत्थान के लिए विशेष कार्य किया हो। इस सम्मान के अंतर्गत चयनित विद्वान को रु. 1,01,000/- की राशि का चेक, सम्मान पत्र, मोमेंटो एवं शॉल प्रदान की जाती है।

वर्ष 2021: बैंक ने अवधी, भोजपुरी और बुंदेलखंडी लोकगीतों को लोकप्रिय बनाने एवं लोकभाषा में सराहनीय योगदान करने हेतु वर्ष 2021 के लिए प्रसिद्ध लोकगायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी को “महाराजा सयाजीराव लोक भाषा सम्मान” से सम्मानित किया। यह सम्मान गंगटोक में आयोजित राजभाषा अधिकारियों की वार्षिक समीक्षा बैठक में कार्यपालक निदेशक श्री अजय के खुराना के कर-कमलों से प्रदान किया गया।

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वर्ष 2019 : बैंक ने सुप्रसिद्ध भाषाविद् एवं गुजराती भाषा की चौधरी, धोडिया, गामित और कुंकणा बोलियों के क्षेत्र में विशेष योगदान देनेवाले लोकभाषा सेवी और पीआरबी आर्ट्स एवं पीजीआर कॉमर्स कॉलेज, बारडोली के एशोसिएट प्रोफेसर डॉ. विक्रम चौधरी को वर्ष 2019 हेतु “महाराजा सयाजीराव लोकभाषा सम्मान” से सम्मानित किया। यह सम्मान मुख्य महाप्रबंधक (परिचालन) श्री के सत्यनारायण राजू के कर-कमलों से प्रदान किया गया।

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वर्ष 2018: बैंक ने भारत की लुप्त हो रही भाषाओं और संस्कृति के साथ ही लोक परंपरा को पुनर्जीवित करने में प्रो. गणेश देवी के उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए उन्हें वर्ष 2018 हेतु “महाराजा सयाजीराव लोक भाषा सम्मान” से सम्मानित किया। यह सम्मान तत्कालीन कार्यपालक निदेशक श्री शांति लाल जैन के कर-कमलों से प्रदान किया गया।

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