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Start investing in Mutual Funds.

Mutual Fund Investment

  • Overview
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  • How to invest?
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    म्यूचुअल फंड क्या है?

    म्यूचुअल फंड पैसो का एक पूल है जिसे पेशेवर फंड मैनेजर द्वारा मैनेज किया जाता है


    यह एक न्यास है जो निवेशकों से धन का संग्रहण करता है जो समान निवेश उद्देश्य और समान इक्विटी, बॉण्ड, मनी मार्केट लिखतों और/या प्रतिभूतियों में निवेश करना चाहते हैं, और इस निवेश से समग्र रूप से हुई आय/लाभ का वितरण योजना के “निवल आस्ति मूल्य” या एनएवी की गणना करके लागू व्यय और लेवी की कटौती करके सभी निवेशकों के बीच में अनुपात में किया जाता है। बड़ी संख्या में निवेशकों द्वारा पैसे को एक पूल में डालने को ही म्यूचुअल फंड कहते है.


    हमें म्यूचुअल फंड की आवश्यकता क्यों है?

    केवल बचत नहीं बल्कि निवेश करें, बचत और निवेश के बीच का अंतर समझें. आय से कम खर्च बचत है लेकिन बढ़ती हुई कीमतें समय के साथ आपकी बचत का मूल्य कम कर देंगी. निवेश केवल मुद्रास्फीति के अनुरूप नहीं होकर उससे कहीं अधिक हो जिससे कि वह आय का दूसरा स्रोत बन सके. म्यूचुअल फंड इक्विटी फंड, डेब्ट फंड, निधियों का फंड, एक्सचेंज – ट्रैडेड फंड, स्थायी परिपक्वता योजनाओं, सेक्टर आधारित फंड और अन्य कई इसी प्रकार के उन्नत उत्पादों श्रृंखला प्रदान करता है.


    चाहे इसका उद्देश्य वित्तीय लाभ हो या सुविधा, म्यूचुअल फंड अपने निवेशकों को कई लाभ प्रदान करता है.


    इतिहास

    म्यूचुअल फंड का जन्म स्थान – यूएसए


    भारत में इतिहास:

    • 1964-1987 (चरण I) - यूनिट ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया (यूटीआई) का विकास
    • 1987-1993 (चरण II) - सार्वजनिक क्षेत्र का प्रवेश
    • 1993-1996 (चरण III) - निजी फंड्स का उद्भव
    • 1996-1999 (चरण IV) - विकास और सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड विनियम
    • 1999-2004 (चरण V) - बड़े एवं समरूप उद्योगों का उद्भव
    • 2004 के बाद (चरण VI) - समेकन और विकास

    कैसे निवेश करें ?

    एकमुश्त/एक बारगी निवेश हेतु कोई भी म्यूचुअल फंड में मात्र रू. 5000 के निवेश से बिना किसी अधिक सीमा तक निवेश कर सकता है और अधिकतर म्यूचुअल फंड योजनाओं में रू. 1000 का बाद में/अतिरिक्त अभिदान कर सकते हैं। तथा इक्विटी लिंक बचत योजना (ईएलएसएस) के लिए, न्यूनतम राशि रू. 500 तक हो सकती है.


    यहाँ तक कि सिस्टमैटिक निवेश योजना (एसआईपी) के माध्यम से कोई भी जब तक उसकी इच्छा हो रू. 500 प्रति माह भी निवेश कर सकता है.


    एसआईपी क्या है?

    सिस्टमैटिक निवेश योजना (एसआईपी) म्यूचुअल फंड द्वारा प्रदान की जाने वाली एक निवेश योजना (विधि) है जिसमें एकमुश्त निवेश की बजाय आवधिकता के आधार पर, निर्धारित अंतराल में जैसे महिने में एक बार निर्धारित राशि का निवेश किया जा सकता है. एसआईपी किस्त की राशि कम से कम रू. 500 प्रति माह हो सकती है। एसआईपी आवर्ती जमा के समान है जहाँ पर एक छोटी/निर्धारित राशि प्रति माह जमा की जाती है.


    एसआईपी म्यूचुअल फंड में निवेश करने की एक बहुत ही सरल विधि है जिसमें हर बार बिना चेक देने की बजाय स्थायी अनुदेशों के माध्यम से अपने खाते से प्रति माह राशि डेबिट कराई जा सकती है. एसआईपी के कुछ लाभ नीचे सूचीबद्ध किए गए है :

    • रूपी कॉस्ट एवरेजिंग
    • पॉवर ऑफ़ कम्पाउंडिंग
    • जल्दी की गई शुरूआत अच्छा भुगतान देती है

    अपने निवेश से सर्वश्रेष्ठ प्राप्त करने के लिए, यह महत्त्वपूर्ण है कि लंबी अवधि के लिए निवेश किया जाए, इसका अर्थ है अंत में अधिकतम रिटर्न प्राप्त करने के लिए निवेश की शुरूआत जल्दी की जानी चाहिए.


    म्यूचुअल फंड उत्पाद

    आपकी कोई भी आयु, वित्तीय स्थिति, जोख़िम सह्यता और रिटर्न अपेक्षाएँ हो, आपकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विभिन्न म्यूचुअल फंड योजनाओं की एक विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध है. म्यूचुअल फंड योजनाओं में निवेश करने से पूर्व; आपको यह पता होना चाहिए कि आपकी आवश्यकताओं के लिए कौन-सी योजना सही है..


    वृद्धि योजनाएँ

    मध्यम से दीर्घकाल के लिए पूँजी में वृद्धि का लक्ष्य. इन योजनाओं में सामान्यतः अधिकतर फंड को इक्विटी में निवेश किया जाता है और भविष्य में संभावित मूल्य वृद्धि के लिए अल्पकालिक मूल्य में कमी को सहन करने के लिए तैयार रहते है.


    आय योजनाएँ

    निवेशकों को नियमित और स्थायी आय उपलब्ध कराने का लक्ष्य. इन योजनाओं में सामान्यतः स्थायी आय प्रतिभूतियों जैसे बॉण्ड और कॉर्पोरेट डिबेंचर फिक्सड इनकम में निवेश किया जाता है. इन योजनाओं में पूँजी वृद्धि सीमित होती है.


    बैलेंस योजनाएँ

    आवधिकता के आधार पर अर्जित की गई आय और पूँजी के भाग को वितरित करके ग्रोथ और इनकम प्रदान करने का लक्ष्य। वे उनके प्रस्ताव दस्तावेजों में दर्शाए गए अनुपात में शेयर और स्थायी आय प्रतिभूति दोनों में निवेश करते हैं। शेयर बाज़ार के उछाल पर, इन योजनाओं की एनएवी में सामान्यत उछाल और बाज़ार में गिरावट के समय गिरावट नहीं होती है.


    मनी मार्केट/ लिक्विड योजनाएँ

    आसान तरलता, पूंजी का संरक्षण और मध्यम आय प्रदान करने का लक्ष्य। इस योजना में सामान्यतः अल्पकालिक लिखतों जैसे ट्रेज़री बिलों, सर्टिफिकेट ऑफ़ डिपॉजिट, कॉमर्सियल पेपर तथा अंतर बैंक कॉल मनी में सुरक्षित निवेश किया जाता है। इन योजनाओं के रिटर्न में, मार्केट में प्रचलित ब्याज दरों के आधार पर उतार-चढ़ाव हो सकता है.


    टैक्स सेविंग योजनाएँ (इक्विटी लिंक बचत योजनाएँ - ईएलएसएस)

    यह योजनाएँ निवेशक को समय –समय पर निर्धारित कर कानूनों के अंतर्गत कर में छूट देती हैं और म्यूचुअल फंड के माध्यम से इक्विटी में दीर्घकालिक निवेश करने हेतु प्रोत्साहित करती हैं..


    जो निवेशक इंडेक्स में दिए गए रिटर्न के लगभग समान रिटर्न प्राप्त होने से संतुष्ट हैं उनके लिए इंडेक्स फंड योजनाएँ आदर्श हैं.


    जिन निवेशकों ने पहले से ही किसी विशिष्ट सेक्टर या सैग्मेंट में निवेश करने का निर्णय ले लिया है उनके लिए सेक्टरल फंड योजनाएँ आदर्श हैं.


    स्थायी परिपक्वता योजनाएँ

    स्थायी परिपक्वता योजनाएँ (एफएमपी) म्यूचुअल फंड द्वारा दी जानेवाली निवेश योजनाएँ है जो निर्धारित अवधि के समाप्त होने पर बंद होती हैं, परिपक्वता अवधि एक महिने से तीन/पाँच वर्षों के बीच की हो सकती हैं. यह योजनाएँ मुख्य रूप से डेब्ट उन्मुख होती है, जबकि इनमें से कुछ में थोड़ा इक्विटी घटक हो सकता है


    एक्सचेंज – ट्रैडेड फंड (ईटीएफ)

    एक्सचेंज – ट्रैडेड फंड अनिवार्य रूप से इंडेक्स फंड होते हैं जो स्टॉक की भाँति एक्सचेंज में सूचीबद्ध और ट्रैड किए जाते हैं.


    पूँजी संरक्षण उन्मुखी योजनाएँ

    पूँजी संरक्षण उन्मुखी योजनाओं का प्राथमिक उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाली स्थायी आय प्रतिभूतियों में निवेश करके पूँजी का संरक्षण करने का प्रयास होता है और इक्विटी/इक्विटी आधारित लिखतों में निवेश करके पूँजी वृद्धि जनरेट करना द्वितीय उद्देश्य होता है.


    पूँजी गोल्ड एक्सचेंड ट्रेडेड फंड (जीईटीएफ)

    गोल्ड एक्सचेंड ट्रेडेड फंड नवीन, किफायती और सुरक्षित तरीके से निवेशकों को गोल्ड मार्केट तक पहुँच बनाने में सक्षम बनाता है। गोल्ड ईटीएफ निवेशकों को गोल्ड की बिना वास्तविक प्राप्ति के स्टॉक एक्सचेंज में यूनिटों की खरीद और बिक्री द्वारा गोल्ड बुलियन मार्केट में सहभागिता लेने के लिए लाया गया है.


    मात्रात्मक निधियाँ

    मात्रात्मक निधि एक निवेश फंड है, जो मात्रात्मक विश्लेषण के आधार पर प्रतिभूतियों का चयन करता है। ऐसे फंड के मैनेजर निवेश के आकर्षक होने या नहीं होने के निर्णय हेतु कम्प्यूटर आधारित मॉडल बनाते हैं। एक शुद्ध “मात्रा खरीद” की खरीद या बिक्री के लिए अंतिम निर्णय मॉडल द्वारा किया जाता है। तथापि, ऐसी स्थिति भी होती है जहाँ फंड मैनेजर मात्रात्मक मॉडल के अतिरिक्त मानवीय निर्णयों का भी प्रयोग करता है.


    विदेश में निधियों का निवेश

    भारतीय अर्थव्यवस्था के खुलने के बाद, म्यूचुअल फंड को विदेशी प्रतिभूतियों/अमेरिकी डिपॉजिटरी रसीदों (एडीआर)/वैश्विक डिपॉजिटरी रसीदों (जीडीआर) में निवेश करने को मंजूरी दी गई है. ऐसी कुछ योजनाओं के फंड विदेश में ही निवेश करने के लिए समर्पित होते है जबकि अन्य निवेश आंशिक रूप से विदेशी प्रतिभूतियों तथा आंशिक रूप से घरेलू प्रतिभूतियों में निवेश किए जाते हैं। हालांकि अधिकतर ऐसी योजनाएँ पूरी दुनिया में प्रतिभूतियों में निवेश करती हैं, वहीं कुछ ऐसी भी योजनाएँ हैं जो किसी विनिर्दिष्ट देश में अपना निवेश करने का दृष्टिकोण रखती है.


    निधियों का फंड (एफओएफ)

    निधियों का फंड ऐसी योजनाएँ है जिनमें अन्य म्यूचुअल फंड योजनाओं में निवेश किया जाता है। इन योजनाओं के पॉर्टफोलियों में केवल अन्य म्यूचुअल फंड योजनाओं तथा कैश/मनी मार्केट प्रतिभूतियों/अल्पकालिक जमा लंबित अविनियोजन की यूनिट शामिल होगी। निधियों का फंड विनिर्दिष्ट क्षेत्र उदा. रियल इस्टेट एफओएफ, विनिर्दिष्ट थीम उदा. इक्विटी एफओएफ, विनिर्दिष्ट उद्देश्य उदा. लाइफ स्टेज एफओएफ या विनिर्दिष्ट स्टाईल उदा. आक्रामक / सतर्क एफओएफ आदि हो सकती हैं.


    कृपया ध्यान रखें कि कोई एक योजना सभी समय के लिए आपकी सभी आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर सकती है। आपको अपने धन को न्यायसंगत तरीके से विभिन्न योजनाओं जो आपके लिए बेहतर हो उनमें वृद्धि, आय तथा स्थिरता के मिश्रण में निवेश करना चाहिए। ध्यान रहे कि उच्च रिटर्न की चाहत के साथ आपको उच्च जोख़िम के लिए भी तैयार रहना होगा.


    अन्य लिंक
      मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट कं लिमि आदित्यल बिड़ला एसेट मैनेजमेंट कंपनी बड़ौदा एसेट मैनेजमेंट इंडिया लिमिटेड . फ्रेंकलिन टेम्पिलटन म्युइच्यूदअल फंड आईडीएफसी म्युपच्युेअल फंड कोटक म्युमच्युचअल फंड निप्पॉसन इंडिया म्यु च्युदअल फंड एसबीआई म्यु च्युेअल फंड सुंदरम म्यु च्युेअल फंड यूटीआई म्यु च्युेअल फंड एक्सिस म्यु च्युेअल फंड केनरा रिबेको म्युयच्युडअल फंड डीएसपी म्यु च्युेअल फंड एडलवाईस एएमसी आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल एसेस मैनेजमेंट कंपनी लिमि मिराई एसेस मैनेजमेंट कं प्रिंसिपल म्यु च्युेअल फंड एचडीएफसी म्यु च्युेअल फंड एल एण्डम टी म्यु च्युडअल फंड टाटा म्युमच्युचअल फंड एलआईसी म्युचुअल फंड
    ********** अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न FAQs **************
    बैंक ऑफ़ बड़ौदा में म्यूचुअल फंड उत्पाद उपलब्ध हैं?

    बैंक ऑफ़ बड़ौदा के पास सभी उत्पाद उपलब्ध हैं। आप किसी भी शाखा में संपर्क कर सकते है या हमारे टोल फ्री नंबर या हमारी वेबसाइट पर जाएँ


    भारत में म्यूचुअल फंड को कौन नियंत्रित करता है?

    सभी म्यूचुअल फंड सेबी के साथ पंजीकृत हैं और यह सेबी द्वारा निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए बनाए गए सख्त विनियमनों के प्रावधानों के अंदर कार्य करते हैं। सेबी द्वारा म्यूचुअल फंड के परिचालन की नियमित निगरानी की जाती है


    भारत में म्यूचुअल फंड कौन बेच सकता है?

    म्यूचुअल फंड विनियमनों के अनुसार, सभी एमएफडी को म्यूचुअल फंड उत्पादों की खरीद और/या वितरण करने से पहले निम्नलिखित दो आवश्यकताओं को पूरा करना होगा :

    • म्यूचुअल राष्ट्रीय प्रतिभूति प्रबंधन संस्थान का संबंधित प्रमाण पत्र प्राप्त करना; और
    • भारत में म्यूचुअल फंड एसोसिएशन (एएमएफआई) के साथ पंजीकरण और एएमएफआई पंजीकरण नंबर (एआरएन) प्राप्त करना.

    उसी प्रकार, म्यूचुअल फंड उत्पादों की खरीद और/या वितरण हेतु नियुक्त होने से पहले, एमएफडी के कर्मचारियों को संबंधित एमआईएसएम प्रमाणपत्र और एएमएफआई के साथ पंजीकरण और कर्मचारी विशिष्ट पहचान संख्या (ईयूआईएन) प्राप्त करना.


    जोख़िम सहायता आधार पर कौन से पोर्टफोलियों अच्छे हैं?
    आक्रामक योजना साधारण योजना संतुलित योजना
    वृद्धि योजना 60-70% 30-40% 10%
    संतुलित योजना 10-20% 40-50% 20-30%
    आय योजना 10-15% 20% 50-60%
    मनी मार्केट योजना 5% 10% 10%
    के लिए उपयुक्त
    • अपने प्रमुख अर्जन वर्षों में निवेशक अधिक जोख़िम लेने के लिए तैयार रहते है।
    • लंबी अवधि में वृद्धि चाहने वाले निवेशक
    • आय और साधारण वृद्धि चाहने वाले निवेशक
    • स्थिरता और साधारण जोख़िम के साथ वृद्धि चाहने वाले निवेशक
    सेवानिवृत्त तथा अन्य निवेशक जो पूँजी आरक्षित रखते हुए नियमित आय चाहते हैं

    म्युचुअल फंड उत्पादों के मूल्य/निष्पादन को कैसे जाना जाता है?

    म्यूचुअल फंड की किसी भी विशिष्ट योजना के प्रदर्शन को निवल आस्ति मूल्य (एमएवी) द्वारा लक्षित किया जाता है.


    निवेशकों से संग्रहित किए गए धन को म्यूचुअल फंड प्रतिभूति बाज़ार में निवेश करता है. साधारण शब्दों में, निवल आस्ति मूल्य योजना में धारित प्रतिभूतियों का बाज़ार मूल्य होता है. चूँकि, प्रतिभूतियों का बाज़ार मूल्य प्रतिदिन परिवर्तित होता रहता है, इसलिए योजना की एनएवी भी प्रतिदिन के आधार पर भिन्न होती है. प्रति यूनिट की एनएवी, योजना की प्रतिभूतियों के बाज़ार मूल्य को किसी भी विशिष्ट तारीख को योजना की कुल यूनिट संख्या से भाग देने पर आती है. उदाहरणार्थ, यदि म्यूचुअल फंड योजना की प्रतिभूतियों का बाज़ार मूल्य रू. 200 लाख है और निवेशकों को रू. 10 प्रति यूनिट पर म्यूचुअल फंड की 10 लाख यूनिट जारी की गई है, तो फंड की प्रति यूनिट एनएवी रू. 20 होगी. म्यूचुअल फंड द्वारा योजना के प्रकार के अनुसार दैनिक या साप्ताहिक आधार पर नियमित रूप से उद्घाटित करनी होगी.


    वित्तीय/निवेश लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए म्यूचुअल फंड कैसे उपयोगी हो सकता है?

    म्यूचुअल फंड निवेशक के निवेश उद्देश्य और सीमा पर आधारित अल्पकालिक या दीर्घकालिक हो सकता है. म्यूचुअल फंड योजनाओं के विभिन्न प्रकार है – जिन्हें विभिन्न प्रकार की प्रतिभूतियों में निवेशित किया जाता है – इक्विटी और डेब्ट जो भी विभिन्न निवेशकों की आवश्यकताओं और निवेश लक्ष्यों के अनुरूप हो.

    पूँजी संरक्षण बचत बैंक खाता पीपीएफ (सामान्य भविष्य निधि) तरल निधि
    सामान्य आय सावधि जमा पीओ – मिस डेब्ट फंड
    पूँजी वृद्धि रियल इस्टेट गोल्ड इक्विटी फंड

Birthplace of Mutual Funds – USA

History in India:
  • 1964-1987 (Phase I) – Growth of Unit Trust of India (UTI)
  • 1987-1993 (Phase II) – Entry of Public Sector
  • 1993-1996 (Phase III) – Emergence of Private Funds
  • 1996-1999 (Phase IV) – Growth and SEBI (Securities and Exchange Board of India) Regulation
  • 1999-2004 (Phase V) – Emergence of large & uniform Industry
  • 2004 onwards (Phase VI) – Consolidation and growth

One could start investing in mutual funds with just Rs. 5,000 for a lump-sum/one-time investment with no upper limit and Rs. 1,000 towards subsequent/additional subscription in most of the mutual fund schemes. And for Equity linked Savings Schemes (ELSS), the minimum amount is as low as Rs. 500.
In fact, one could invest via Systematic Investment Plan (SIP) with as little as Rs. 500 per month for as long as one wishes to.

Systematic Investment Plan (SIP) is an investment plan (methodology) offered by mutual funds wherein one could invest a fixed amount in a mutual fund scheme periodically, at fixed intervals – say once a month, instead of making a lump-sum investment. The SIP instalment amount could be as little as Rs. 500 per month. SIP is similar to a recurring deposit where you deposit a small, fixed amount every month.

SIP is a very convenient method of investing in mutual funds through standing instructions to debit your bank account every month, without the hassle of having to write out a cheque each time. Some of the benefits of SIP are listed below.

  • Rupee cost averaging
  • The power of compounding
  • Starting early pays well

To get the best out of your investments, it is very important to invest for the long-term, which means that you should start investing early, in order to maximize the end returns.

There are wide variety of mutual fund schemes that cater to your needs, whatever your age, financial position, risk tolerance and return expectations. Before investing in mutual fund schemes; you should know which scheme suits your requirements.

Growth Schemes

Aim to provide capital appreciation over the medium to long term. These schemes normally invest a majority of their funds in equities and are willing to bear short-term decline in value for possible future appreciation.


Income Schemes

Aim to provide regular and steady income to investors. These schemes generally invest in fixed income securities such as bonds and corporate debentures. Capital appreciation in such schemes may be limited.


Balanced Schemes

Aim to provide both growth and income by periodically distributing a part of the income and capital gains they earn. They invest in both shares and fixed income securities in the proportion indicated in their offer documents. In a rising stock market, the NAV of these schemes may not normally keep pace or fall equally when the market falls.

Money Market/Liquid Schemes

Aim to provide easy liquidity, preservation of capital and moderate income. These schemes generally invest in safer, short-term instruments such as treasury bills, certificates of deposit, commercial paper, and interbank call money. Returns on these schemes may fluctuate, depending upon the interest rates prevailing in the market.

Tax Saving Schemes (Equity Linked Saving Scheme - ELSS)

These schemes offer tax incentives to the investors under tax laws as prescribed from time to time and promote long term investments in equities through mutual funds. Index fund schemes are ideal for investors who are satisfied with a return approximately equal to that of an index. Sectoral fund schemes are ideal for investors who have already decided to invest in a particular sector or segment.

Fixed Maturity Plans

Fixed Maturity Plans (FMPs) are investment schemes floated by mutual funds and are close ended with a fixed tenure, the maturity period ranging from one month to three/five years. These plans are predominantly debt-oriented, while some of them may have a small equity component.

Exchange Traded Funds (ETFs)

Exchange Traded Funds are essentially index funds that are listed and traded on exchanges like stocks.

Capital Protection Oriented Schemes

Capital Protection Oriented Schemes are schemes that endeavour to protect the capital as the primary objective by investing in high quality fixed income securities and generate capital appreciation by investing in equity/equity related instruments as a secondary objective.

Gold Exchange Traded Funds (GETFs)

Gold Exchange Traded Funds offer investors an innovative, cost-efficient, and secure way to access the gold market. Gold ETFs are intended to offer investors a means of participating in the gold bullion market by buying and selling units on the Stock Exchanges, without taking physical delivery of gold.

Quantitative Funds

A quantitative fund is an investment fund that selects securities based on quantitative analysis. The managers of such funds build computer-based models to determine whether an investment is attractive. In a pure "quant shop" the final decision to buy or sell is made by the model. However, there is a middle ground where the fund manager will use human judgment in addition to a quantitative model.

Funds Investing Abroad

With the opening up of the Indian economy, mutual funds have been permitted to invest in foreign securities/American Depository Receipts (ADRs)/Global Depository Receipts (GDRs). Some of such schemes are dedicated funds for investment abroad while others invest partly in foreign securities and partly in domestic securities. While most such schemes invest in securities across the world there are also schemes which are country specific in their investment approach.

Fund of Funds (FOFs)

Fund of Funds are schemes that invest in other mutual fund schemes. The portfolio of these schemes comprises only of units of other mutual fund schemes and cash/money market securities/short term deposits pending deployment. Fund of Funds can be Sector specific e.g. Real Estate FOFs, Theme specific e.g. Equity FOFs, Objective specific e.g. Life Stages FOFs or Style specific e.g. Aggressive/Cautious FOFs etc.

Please bear in mind that any one scheme may not meet all your requirements for all time. You need to place your money judiciously in different schemes to be able to get the combination of growth, income and stability that is right for you. Remember, as always, higher the return you seek higher the risk you should be prepared to take.

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  • Are mutual fund products available in Bank of Baroda?

    All the products are available with the Bank of Baroda. You can contact the branch manager in each branch or can call our toll-free number or visit our website.

  • Who regulates the mutual fund in India?

    All mutual funds are registered with SEBI and they function within the provisions of strict regulations designed to protect the interests of investors. The operations of mutual funds are regularly monitored by SEBI.

  • Who can sell the mutual fund in India?

    As per SEBI Mutual Fund Regulations, all MFDs must fulfil the following two requirements before engaging in sale and/or distribution of mutual fund products, namely

    • Obtain the relevant certification of National Institute of Securities Management (NISM); and
    • Register with Association of Mutual Funds in India (AMFI) and obtain AMFI Registration Number (ARN).

    Likewise, before being employed in sale and/or distribution of mutual fund products, employees of MFDs are also required to obtain the relevant NISM certification and register with AMFI and obtain Employee Unique Identification Number (EUIN).

  • What is the suggested portfolio based on risk tolerance?
    Aggressive Plan Moderate Plan Conservative Plan
    Growth Schemes 60-70% 30-40% 10%
    Balanced Scheme 10-20% 40-50% 20-30%
    Income Scheme 10-15% 20% 50-60%
    Money Market Scheme 5% 10% 10%
    Suitable for
    • Investors in their prime earning years and willing to take more risk
    • Investors seeking growth over a long term
    • Investors seeking income and moderate growth
    • Investors looking for growth and stability with moderate risk
    • Retired and other investors who need to preserve capital and earn regular income
  • How is the value/performance of the Mutual Fund products known?

    The performance of a particular scheme of a mutual fund is denoted by Net Asset Value (NAV).

    Mutual funds invest the money collected from the investors in securities markets. In simple words, Net Asset Value is the market value of the securities held by the scheme. Since market value of securities changes every day, NAV of a scheme also varies on day-to-day basis. The NAV per unit is the market value of securities of a scheme divided by the total number of units of the scheme on any particular date. For example, if the market value of securities of a mutual fund scheme is Rs. 200 lakhs and the mutual fund has issued 10 lakhs units of Rs. 10 each to the investors, then the NAV per unit of the fund is Rs. 20. NAV is required to be disclosed by the mutual funds on a regular basis - daily or weekly - depending on the type of scheme.

  • How Mutual Funds can be useful in achieving financial/Investment goals?

    Mutual funds can be for the short term or for longer term based on one’s investment horizon and objective. There are different types of mutual fund schemes – which invest in different types of securities – in equity as well as debt securities that are suitable for different investor needs and investment goals.

    Capital Presevation Saving Bank Account PPF (Public Provident Fund) Liquid Funds
    Generate Income Fixed Deposits Po-mis Debt Funds
    Capital Appreciation Real Estate Gold Equity Funds

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